क्या आज़ाद हूं मैं?

धर्म, जात- पात मै फसा गुलाम हूं मै,
क्या आज़ाद हूं मैं?

छीन के इज्जत सड़क में फेक दी गई जान हूं मै,
क्या आज़ाद हूं मैं?

लूट और भ्रष्टाचार के जंजाल में फसा इंसान हूं मै,
क्या आज़ाद हूं मैं?

शिक्षा पाने को अब भी बेकरार हूं मै,
बेरोजगरी से भूखा सो रहा इंसान हूं मै,
क्या आज़ाद हूं मैं?

सालो तक न्याय की उम्मीद में दर दर भटकती आवाम हूं मै,
क्या आज़ाद हूं मैं?

सेहरो मै कैद कर दिया गया इंसान हूं मै,
खुलकर सांस लेने को बेकरार हूं मै,
क्या आज़ाद हूं मैं?

कहीं बाढ़ में डूब रहा, तो कहीं बूंद बूंद का हो रहा महूताज हूं मै,
क्या आज़ाद हूं मैं?

सरहद में लड़ता जवान हूं मै,
घरवालों से मिलने को बेकरार कश्मीरी आवाम हूं मै,
अपने ही घर में खुलकर रहने को बेकरार हूं मै,
73 साल के आज़ाद, अखंड देश की दबी आवाज़ हूं मै,
क्या सच में आज़ाद हूं मैं?

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